हरक सिंह ने किया बड़ा ऐलान, कहा ‘2024 चुनाव लड़ूंगा’, कांग्रेस में फूट पड़ने के संकेत

उत्तराखंड की राजनीति में इन दिनों कांग्रेस के भीतर चल रही उथल पुथल खुल कर सामने आ गई है। ऐसे में एक बड़ा सवाल ये उठने लगा है कि...

हरिद्वार/देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में इन दिनों कांग्रेस के भीतर चल रही उथल पुथल खुल कर सामने आ गई है। ऐसे में एक बड़ा सवाल ये उठने लगा है कि क्या पार्टी में फूट पड़ सकती है। इस सवाल के उठने की सबसे बड़ी वजह पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत और पूर्व नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह के बीच बढ़ रही जुगलबंदी को माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि ये दोनों नेता लगातार दूसरे दिन बैठक के नाम पर साथ दिखाई दिए। इसी बीच अपने पहले के बयानों से इतर हरक सिंह ने तो खुलकर ऐलान भी कर दिया कि वह साल 2024 का लोकसभा चुनाव मैदान में उतरेंगे।

harak singh rawat and pritam singh

गौरतलब है कि इससे पहले के बयानों में पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत ने कहा था कि वह चुनाव नहीं लड़ेंगे लेकिन मंगलवार 12 जुलाई को हरिद्वार स्थित जयराम आश्रम पहुंचे हरक ने कहा कि वह ​हरिद्वार या पौड़ी से लोकसभा चुनाव में ताल ठोकेंगे। हालांकि इस दौरान उन्होंने पार्टी पर निर्णय छोड़ने की बात करते हुए सफाई दी कि पहले उन्होंने विधानसभा चुनाव न लड़ने की बात कही थी। बता दें कि आश्रम में हरक सिंह के साथ प्रीतम सिंह, उप नेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी समेत अन्य कांग्रेसी नेता भी दिखाई दिए, जो एक दिन पहले देहरादून में हरक के घर में हुई बैठक में शामिल हुए थे।

बता दें कि उत्तराखंड में कांग्रेस के दो गुट माने जाते हैं। एक पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का गुट है तो दूसरा प्रीतम सिंह का। बीते दिनों हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली करारी हार के बाद प्रीतम गुट को विधानसभा से लेकर संगठन तक दरकिनार कर दिया गया। ऐसे में पिछले दिनों राज्य में हुए कांग्रेस के कार्यक्रमों और प्रेस कॉन्फ्रेंसों से भी प्रीतम अलग थलग ही नजर आये। अब प्रीतम सिंह कांग्रेस संगठन पर कमज़ोर होने का आरोप लगाकर पार्टी को मज़बूत करने का दावा कर रहे हैं।

इधर, हरक सिंह रावत पिछली बीजेपी सरकार में मंत्री रहे लेकिन चुनाव से ऐन पहले उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया। इसके बाद वह कांग्रेस में शामिल हो गए। हालांकि उन्होंने खुद चुनाव नहीं लड़ा लेकिन बहू अनुकृति गुसाईं को टिकट दिलवाया लेकिन वह चुनाव जीत नहीं सकीं। विधानसभा चुनाव में हुई कांग्रेस की हार के बाद से पार्टी ने उनकी कोई भूमिका तय नहीं हुई। ऐसे में अलग थलग पड़े हरक और प्रीतम की जुगलबंदी इन अटकलों को हवा दे रही है कि दोनों मिलकर क्या कोई नयी पार्टी गठित कर सकते हैं? या कांग्रेस को दोफाड़ करने की कोई बड़ी रणनीति है?

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