पीठ पर 40 लीटर पानी लेकर चढ़ाई करने को मजबूर हैं इस इलाके की महिलाएं

ऊंचे-नीचे और पथरीले रास्ते पर्यटकों को भले ही लभते हों लेकिन यहां रहने नाबले लोगों के बेहद कठिनाई भरे होते हैं...

पिथौरागढ़। ऊंचे-नीचे और पथरीले रास्ते पर्यटकों को भले ही लभते हों लेकिन यहां रहने नाबले लोगों के बेहद कठिनाई भरे होते हैं। उत्तराखंड भारत के पर्वतीय राज्यों में से एक है। यहां की खूबसूरती देखने के लिए लोग देश विदेश से आते हैं। यहां के ऊंचे पहाड़ पर्यटकों को जितने खूबसूरत लगते हैं। यहां के लोगों के लिए उससे कही अधिक तकलीफदेह होते हैं।

water crisis

बता दें कि इन पहाड़ों पर रहने वाले लोग बेहद कठिन परिस्थितियों में जीवन व्यतीत करते हैं। टेढ़े-मेढ़े रास्तों के साथ पहाड़ों की कठिन चढ़ाई और संसाधनों की भारी कमी से यहां के लोगों को जीवन यापन करने में काफी मुश्किल होती हैं। इन समस्याओं को यहां के लोग अपनी मजबूरी और अपनी जीवनशैली का हिस्सा मानते हैं। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जैसे पहाड़ी ज़िलों में ग्रामीण महिलाओं की जिंदगी बेहद मुश्किल भरी होती है। इनके ऊपर पहाड़ जैसी जिम्मेदारियां होती हैं।

राज्य के सीमांत जिले पिथौरागढ़ में कई ऐसे गांव हैं, जहां सरकार की तमाम पेयजल योजनाएं आज तक नहीं पहुंच पाई हैं। यही वजह है कि यहां महिलाओं को प्राकृतिक जल स्रोतों से पानी लाना पड़ता है। ये जल स्रोत इनके घरों से काफी दूर होते हैं। इन जल स्रोतों से पानी पीठ पर ढोने में ही महिलाओं का सारा दिन निकल जाता है। पहाड़ के चढ़ाई वाले रास्तों पर 40 लीटर के बर्तन में पानी भर कर चलने की कल्पना शायद ही कोई शहरी व्यक्ति कर पाए।

हम पिथौरागढ़ के ग्रामीण इलाके सेरी कांडा की बात कर रहे हैं। इस इलाके में अभी तक सरकार पेयजल योजनाएं नहीं पहुंच सकी हैं। नतीजा यह है कि यहां की महिलाओं को पानी के लिए दो किलोमीटर दूर पहाड़ की चढ़ाई करनी पड़ती है। सेरी कांडा के लोग पेयजल की समस्या को लेकर कई बार जिला मुख्यालय में अर्जी लगा चुके हैं। इस गांव जैसे पिथौरागढ़ में और भी ऐसे गांव हैं, जहां सरकारी पेयजल की सुविधा अभी तक नहीं हो सकी है।

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