Lalu Yadav बरी होंगे या मिलेगी सजा, चारा घोटाले में जेल होने पर कब मिलेगी बेल, चर्चाएं तेज

कानून के जानकारों का मानना है कि जिस तरह से चारा घोटाले के चार मामलों में सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा उन्हें पहले ही दोषी करार दिया जा चुका है ,उसे देखते हुए यह संभावना जतायी जा रही है कि झारखंड में लालू प्रसाद के खिलाफ चारा घोटाले के पांचवें और अंतिम मामले में भी उन्हें सजा सुनायी जा सकती है।

रांची। आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद (Lalu Yadav) के खिलाफ रांची स्थित सीबीआई की विशेष अदालत 15 फरवरी को चारा घोटाले के सबसे बड़े डोरंडा कोषागार से अवैध निकासी मामले में फैसला सुनाएगी। करीब 139.5 करोड़ रुपये की अवैध निकासी से जुड़े इस मामले में लालू प्रसाद बरी होंगे या सजा मिलेगी, जेल होने पर कितने दिनों में बेल मिलेगी, इन सारे विषयों पर चर्चाएं तेज हो गयी है।Lalu Yadav

चार मामले में पहले ही सुनायी जा सकी है सजा

कानून के जानकारों का मानना है कि जिस तरह से चारा घोटाले के चार मामलों में सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा उन्हें पहले ही दोषी करार दिया जा चुका है ,उसे देखते हुए यह संभावना जतायी जा रही है कि झारखंड में लालू प्रसाद (Lalu Yadav) के खिलाफ चारा घोटाले के पांचवें और अंतिम मामले में भी उन्हें सजा सुनायी जा सकती है। रांची स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने डोरंडा कोषागार से अवैध निकासी से जुड़े इस मामले में 15 फरवरी को फैसला सुनाये जाने की तिथि निर्धारित की है और लालू प्रसाद अदालत में सशरीर उपस्थित होने के लिए 14 फरवरी को ही रांची पहुंच जाएंगे।

जेल होने पर जमानत के लिए करना पड़ सकता है इंतजार

कानून के जानकारों का कहना है कि लालू प्रसाद (Lalu Yadav) यदि बरी हो जाते है, तब तो उन्हें कोई परेशानी नहीं होगी,वहीं उन्हें यदि तीन साल से कम सजा मिलती है, तो निचली अदालत से ही जमानत मिल जाएगी, लेकिन यदि तीन साल से अधिक की सजा हुई, तो उन्हें जमानत के लिए हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल करनी होगी, वहीं कोरोना गाइडलाइन के कारण जिस तरह से एहतियात बरतते हुए सुनवाई चल रही है, वैसी स्थिति में उन्हें जमानत के लिए 4-5 सप्ताह का इंतजार करना पड़ सकता है और सजा सुनाये जाने के साथ ही उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया जाएगा।

स्कूटर-मोपेड से ढोये गये साढ़, बछिया और हाईब्रिड भैंस

बहुचर्चित चारा घोटाले में कई ऐसे तथ्य सामने आये थे, जिसने सभी को हैरत में डाल दिया था। पशुपालन विभाग के पदाधिकारियों-कर्मचारियों, राजनेताओं और आपूर्तिकर्त्ताओं की मिलीभगत से कई ऐसे गड़बड़ी उजागर हुए थे, जो बेहद चौंकाने वाले थे। घोटाले में कुछ ऐसे दस्तावेज भी सीबीआई को हाथ लगे थे, जिसमें फर्जी बिल के आधार पर करोड़ों रुपये की निकासी किये थे, इसमें साढ़, बछिया और हाईब्रिड भैंस ढोने के लिए कुछ ऐसे वाहनों के नंबर दिये गये थे, जो छानबीन में स्कूटर और मोपेड के निकले।

गृहयुद्ध की तरफ बढ़ रहा भारत – Lalu Prasad Yadav

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