अजब-गजब कारनामा: मौत के 4 साल बाद शिक्षक का हुआ तबादला, मंत्री ने जताई नाराजगी

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक मृतक शिक्षक का तबादला किए जाने की...

देहरादून। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक मृतक शिक्षक का तबादला किए जाने की खबर से हड़कंप मच गया है। मामले की खबर मिलते ही शिक्षा मंत्री डॉ.धन सिंह रावत ने महानिदेशक को जांच के आदेश दे दिए हैं। शिक्षा मंत्री ने अपने आदेश में कहा है कि तीन दिन के भीतर जांच कर कार्रवाई की जाए। मंत्री ने इसे घोर लापरवाही मानते हुए संबंधित अफसरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को कहा।

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गौरतलब है कि कई बीमारियों से परेशान शिक्षक बीरपाल सिंह कुंवर इलाज के लिए सुगम क्षेत्र के स्कूल में तबादला चाह रहे थे। इसके लिए उन्होंने विभाग में कई प्रार्थना पत्र भी दिए लेकिन उस वक्त विभाग ने ध्यान नहीं दिया। वहीं अब उनकी मौत के करीब चार साल बाद विभाग द्वारा उनके तबादले का आदेश जारी किया गया है। दरअसल, रुद्रप्रयाग जिले में वार्षिक स्थानांतरण 2022-23 के अंतर्गत मृतक शिक्षक के तबादले का मामला सामने आने पर शिक्षा मंत्री ने खासी नाराजगी जताई है।

उन्होंने कहा कि इस प्रकरण में प्रथम दृष्टया विभागीय अफसरों घोर लापरवाही प्रतीत होती है। उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा बंशीधर तिवारी को तत्काल समिति गठित कर मामले की जांच कर तीन दिन के भीतर रिपोर्ट देने के साथ ही लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई को कहा है। इस दौरान मंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिया कि स्थानांतरण प्रक्रिया में किसी भी तरह की लापवाही न बरती जाये।

पहले भी हो चुकी है ऐसी लापरवाही

शिक्षा विभाग में लापरवाही का ये पहला मामला नहीं है जब किसी शिक्षक की मौत के बाद उसका तबादला किया गया है। इससे पहले भी यहां इस तरह के कारनामे हो चुके हैं। बीते वर्ष साल भी विभाग में सेवानिवृत्त और दिवंगत शिक्षकों के प्रमोशन कर दिए गए थे। उस वक्त विभाग की तरफ से सहायक अध्यापक एलटी और लेक्चरर के पदों से प्रधानाध्यापकों के पदों पर पदोन्नति की जो लिस्ट जारी की गई थी, उसमें नौ दिवंगत, आठ सेवानिवृत्त और दो ऐसे शिक्षक थे जिनका पहले ही प्रमोशन हो चुका था और वे प्रधानाध्यापक बन चुके थे। इस मामले का मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लिया था। साथ ही विभाग की ओर से भी जांच के निर्देश दिए गए थे लेकिन बाद में सबकुछ ठंडे बस्ते में चला गया और अब तक किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

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