उत्तरकाशी। उत्तराखंड में उत्तरकाशी जिले में स्थित स्युना गांव की कुछ डरावनी तस्वीरें सामने आ रही हैं। यह गांव जिला मुख्यालय से महज 4 किलोमीटर की दूरी पर है लेकिन यहां रह रहे ग्रामीणों को सुबह शाम टूटी और पुरानी हो चुकी रस्सियों के सहारे ट्रॉली पर सफर कर उफनाती भागरथी नदी को पार करना पड़ता है। ऐसे में उनकी जान पर हमेशा खतरा मंडराता रहता है। ग्रामीणों ने बच्चों के साथ मिलकर डीएम कार्यालय में अपनी समस्या बताई और उसके समाधान की मांग की।

बताया जा रहा है कि गांव में सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों, उनके परिजन और बुजुर्ग लोगों को हो रही है। स्युना गांव के लिए आज तक एक अदद पुल नहीं बनवाया जा सका। भागीरथी की उफनती धारा को पार कर रस्सों को खींचने वाले छात्रों को कहना है कि इसकी वजह से गांव के कई लोग चोटिल भी हो चुके हैं। वहीं कई बार नदी में गिरते-गिरते बचे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि मानसून आते ही ग्रामीणों के लिए बना नदी किनारे पैदल रास्ते वाला लकड़ी का कच्चा पुल बह जाता है, जिससे बुजुर्ग, बच्चे और गर्भवती महिलाओं ट्रॉली से नदी पार करनी पड़ती है लेकिन रस्सियां और ट्रॉली पुरानी होने की वजह से हमेशा अनहोनी का खतरा बना रहता है। बारिश के बता दें कि बारिश के सीजन में भागीरथी नदी का बहाव भी काफी तेज रहता है लेकिन प्रशासन ने आज तक इस पर ध्यान नहीं दिया है।
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