भारत और अमेरिका के बीच तय हुआ बड़ा लक्ष्‍य, हुआ 500 अरब डॉलर का सौदा

अमेरिका भारत बिजनेस काउंसिल (यूएसआईबीसी) के नए अध्यक्ष अतुल केशप ने कहा है कि अपने संबंधों में उल्लेखनीय प्रगति कर चुके अमेरिका और भारत को इन्हें नए स्तर पर ले जाने और द्विपक्षीय कारोबार में 500 अरब डॉलर का महत्वाकांक्षी लक्ष्य हासिल के लिए बड़े लक्ष्य तय करने चाहिए। केशप ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए साक्षात्कार में कहा, ‘‘यह दर्शाना आवश्यक है कि अमेरिका और भारत वैश्विक वृद्धि के वाहक हो सकते हैं, 21वीं सदी में समद्धि और वृद्धि के मॉडल हो सकते हैं।’’

अमेरिका भारत बिजनेस काउंसिल (यूएसआईबीसी) के नए अध्यक्ष अतुल केशप ने कहा है कि अपने संबंधों में उल्लेखनीय प्रगति कर चुके अमेरिका और भारत को इन्हें नए स्तर पर ले जाने और द्विपक्षीय कारोबार में 500 अरब डॉलर का महत्वाकांक्षी लक्ष्य हासिल के लिए बड़े लक्ष्य तय करने चाहिए। केशप ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए साक्षात्कार में कहा, ‘‘यह दर्शाना आवश्यक है कि अमेरिका और भारत वैश्विक वृद्धि के वाहक हो सकते हैं, 21वीं सदी में समद्धि और वृद्धि के मॉडल हो सकते हैं।’’

उन्होंने अमेरिकी राजनयिक रहने के दौरान विदेश विभाग में विभिन्न पदों पर काम किया। पिछले वर्ष वह भारत में अमेरिकी मिशन में दूतावास प्रभारी रहे और बाइडन प्रशासन के कार्यकाल के पहले वर्ष में उन्होंने भारत-अमेरिकी संबंधों को आकार देने में अहम भूमिका निभाई।

उन्होंने कहा, ‘‘वैश्विक कारोबार एजेंडा पर आगे बढ़ने की जरूरत है। हमें भविष्य की समृद्धि सुनिश्चित करनी होगी …विशेषकर इस वैश्विक महामारी के बाद।’’ उन्होंने कहा कि इस नई भूमिका में वह द्विपक्षीय कारोबार को 500 अरब डॉलर करने के लक्ष्य को प्राप्त करने में मददगार बनना चाहते हैं।

वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार भारत और अमेरिका के बीच 2020-21 में कुल द्विपक्षीय कारेाबार 80.5 अरब डॉलर था, 2019-20 में यह 88.9 अरब डॉलर था। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का आधार यूरोप और संयुक्त राज्य अमेरिका से दक्षिण पूर्व एशिया में स्थानांतरित हो गया है। हम चालू वित्त वर्ष के लिए 400 बिलियन डालर को छूने के लक्ष्य पर हैं। अब तक पहले नौ महीनों में देश का निर्यात 301.38 अरब अमेरिकी डॉलर का रहा है। दिसंबर 2021, निर्यात 37.8 बिलियन अमरीकी डॉलर रहा, जो किसी भी महीने में सबसे अधिक है। यह आशंका थी कि COVID-19 से विदेशी व्यापार में तेज गिरावट आएगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। हालांकि, महामारी ने हमें विश्व व्यापार की फिर से कल्पना करना सिखाया है।

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