यूपी-बिहार के मुकाबले तमिलनाडु-आंध्र प्रदेश की लोकसभा सीटें क्यों हैं कम? मद्रास HC ने केंद्र से पूछा सवाल |

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चेन्नई, अगस्त 22। मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में एक आदेश पारित कर केंद्र सरकार से पूछा है कि दक्षिण भारत के राज्यों में तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश ने सफलतापूर्वक जनसंख्या को नियंत्रित किया हुआ है, लेकिन उसके बावजूद भी उत्तर प्रदेश, बिहार राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे अधिक आबादी वाले राज्यों की संसद में सीटें अधिक क्यों हैं? ये आदेश मद्रास हाईकोर्ट के पूर्व जज एन किरुबाकरन ने रिटायरमेंट से पहले और जस्टिस बी पुग्लेन्धी ने 17 अगस्त को जारी किया।

हाईकोर्ट ने मांगा 5600 करोड़ रुपए का मुआवजा

आदेश में कहा गया था कि तमिलनाडु को पिछले 14 चुनावों का आर्थिक मुआवजा मिलना चाहिए। कोर्ट के अनुमान से मुआवजा करीब 5,600 करोड़ रुपए तक का हो सकता है। हाईकोर्ट ने कहा कि 1962 तक लोकसभा में तमिलनाडु के 41 प्रतिनिधि थे। इसके बाद जनसंख्या में कमी के कारण तमिलनाडु में लोकसभा सीटों की संख्या घटकर 39 हो गई, बात सिर्फ 2 सीटों की नहीं है, बल्कि लोकतंत्र में हर वोट के मायने हैं। हाईकोर्ट ने 1999 में अटल बिहार वाजपेयी सरकार के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताल का जिक्र करते हुए ये आदेश जारी किया।

 

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